Monday, December 10, 2018

माल्या के प्रत्यर्पण पर आज फैसला, तैयार है आर्थर रोड जेल का ये बैरक

एक तरफ जहां लंदन में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण पर सुनवाई का दिन है, वहीं दूसरी तरफ मुंबई में माल्या को जेल में रखने की तैयारी भी चल रही है. बैंक से हजारों करोड़ का कर्ज लेकर देश छोड़ने वाले विजय माल्या को जब भारत लाया जाएगा तो उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा, जहां हाई सिक्योरिटी वाली बैरक तैयार की गई है.

करीब 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों के चलते भारत में वांछित माल्या पर सोमवार को लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रत्यर्पण संबंधी सुनवाई पर फैसले का दिन है.

किंगफिशर एयरलाइन्स का पूर्व कर्ताधर्ता 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में एक प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर है.

कसाब को इसी जोन में रखा गया था

जेल के एक अधिकारी ने कहा कि अगर माल्या को प्रत्यर्पित किया जाता है तो उसे जेल परिसर के अंदर दो-मंजिला इमारत में स्थित एक उच्च सुरक्षा वाली बैरक में रखा जाएगा. जेल के इसी हिस्से में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को रखा गया था. उन्होंने कहा कि मध्य मुंबई स्थित जेल में उच्च सुरक्षा वाली एक बैरक को तैयार किया गया है.

अधिकारी ने कहा, 'हम माल्या को यहां अपने सुधार केंद्र में सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अगर माल्या को यहां लाया जाता है तो हम उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे.'

उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय आपात स्थिति में माल्या को बैरक से लगे चिकित्सा केंद्र में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है जहां कैदियों के प्राथमिक उपचार के लिए डॉक्टर और अन्य कर्मचारी होते हैं.

अधिकारी के अनुसार, उच्च सुरक्षा वाली बैरक अन्य कोठरियों से अलग हैं. इनमें लगातार सीसीटीवी की निगरानी होती है और अत्याधुनिक हथियारों के साथ सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने पहले कहा था कि मुंबई की आर्थर रोड जेल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कारावासों में से एक है.

अधिकारी का यह बयान तब आया था जब ब्रिटेन ने भारतीय अधिकारियों से आर्थर रोड जेल का एक वीडियो भेजने को कहा था जहां माल्या को प्रत्यर्पण के बाद रखने की योजना है.

Wednesday, December 5, 2018

गोकशी मामले में दो बच्चों के नाम एफआईआर, पुलिस ने चार घंटे पूछताछ की

बजरंग दल नेता की शिकायत पर गोकशी मामले में दर्ज एफआईआर में दो नाबालिगों के नाम भी हैं। दोनों नाबालिगों की उम्र 11 और 12 साल है और दोनों चचेरे भाई हैं। पुलिस ने बुधवार को दोनों को बुलाकर चार घंटे तक पूछताछ की। नाबालिगों के परिजनों का आरोप है कि पुलिस बजरंग दल के नेता योगेश राज के दबाव में परेशान कर रही है। वहीं, पुलिस इसे जांच का हिस्सा बता रही है।

बुलंदशहर के स्याना में सोमवार को गोकशी को लेकर हिंसा फैली थी। हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की भी गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर योगेश की शिकायत पर  गोकशी मामले में दर्ज की गई है। इसमें 7 लोगों के नाम हैं। वहीं, दूसरी एफआईआर हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या के मामले में दर्ज किया गया। इसमें 27 के नाम हैं, 60 से ज्यादा अज्ञात हैं।

बच्चे बेकसूर- नाबालिग के पिता
नाबालिग बच्चे के पिता ने बताया-मेरे बेटे और भतीजे के खिलाफ गोकशी में एफआई दर्ज हुई है। पुलिस हमें थाने में ले गई और परेशान किया गया। हमें चार घंटे बैठाया गया, जबकि बच्चे बेकसूर हैं।

हिंसा और इंस्पेक्टर की हत्या के मुख्य आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह
बजरंगदल के जिला संयोजक योगेश राज ने बुधवार को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर खुद को निर्दोष बताया। योगेश ने कहा, जिस जगह हिंसा हुई, वहां हमारा दल प्रदर्शन नहीं कर रहा था। उस वक्त हम सभी थाने में मौजूद थे और गोकशी की घटना पर एफआईआर दर्ज करा रहे थे। 

बुलंदशहर घटना बड़े षड्यंत्र का हिस्सा- योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार देर रात अफसरों के साथ आवास पर बुलंदशहर में हुई हिंसा की घटनाअों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने मारे गए छात्र सुमित के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। साथ ही गोकशी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा- बुलंदशहर की घटना एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।

योगी ने कहा कि 19 मार्च 2017 से सूबे के सभी अवैध स्लॉटर हाउस बंद कर दिए गए हैं। अगर कहीं अभी भी चल रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की होगी। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने को कहा। योगी ने निर्देश दिया कि प्रदेश में ऐसा अभियान चलाया जाए, जिससे माहौल खराब करने वाले तत्व बेनकाब हो सकें। मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर हिंसा मामले में सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

अब तक 4 गिरफ्तार, 4 लोगों से हिरासत में पूछताछ

मामले में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने कहा कि अभी तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार ही लोगों को हिरासत में पूछताछ की जा रही है। फिलहाल, हालात काबू में हैं। हमारी 6 टीमें छापेमारी कर रही हैं। वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान पर ही कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच एसआईटी कर रही है।

Monday, November 19, 2018

सीबीआई चीफ ने सीवीसी की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर अपना जवाब सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा से कहा था कि जितना जल्दी हो सके, अपना जवाब पेश करें। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सीवीसी की जांच पर आज ही वर्मा को जवाब पेश करना होगा, सुनवाई को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच को वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि सीबीआई डायरेक्टर सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस में अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाएंगे। इस पर बेंच ने कहा- हम तारीख आगे नहीं बढ़ाएंगे। जितना जल्दी हो सके आप जवाब पेश करें, हमें इसे पढ़ना है।

सीवीसी ने कुछ आरोपों पर जांच के लिए वक्त मांगा था

बेंच के निर्देश के बाद शंकरनारायण ने कहा कि आलोक वर्मा खुद सोमवार को अपना जवाब दाखिल करेंगे। इससे पहले अदालत ने कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी रिपोर्ट में कई प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। कुछ आरोपों पर आयोग ने जांच के लिए और वक्त भी मांगा था।

विवाद के बाद नागेश्वर राव हैं एजेंसी के अंतरिम प्रमुख
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था। छुट‌्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी से जांच करने को कहा था।

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सोमवार को पांचवीं और आखिरी लिस्ट जारी कर दी। इसमें आठ नाम हैं। छह नाम नए हैं। दो घोषित उम्मीदवारों के नाम बदले गए हैं। पहला नाम टोंक सीट से मौजूदा विधायक अजीत सिंह का है। इनकी जगह पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से होगा। वहीं, दूसरा नाम खेरवड़ा सीट से शंकरलाल खिराड़ी का है। पहले इन्हें मौजूदा विधायक नानलाल आहरी का टिकट काटकर दिया गया था, लेकिन अब पार्टी ने वापस आहरी पर भरोसा जताया।

टोंक में 2.20 लाख वोटरों में से करीब 40 हजार मतदाता मुस्लिम हैं। यह कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। 1972 के विधानसभा चुनाव से कांग्रेस यहां मुस्लिम उम्मीदवार ही उतार रही थी। 1980 से भाजपा ने यहां से सिर्फ हिंदू उम्मीदवार को ही टिकट दिया। इस बार समीकरण बदल गए। कांग्रेस ने 46 साल की अपनी परंपरा तोड़ते हुए गैर-मुस्लिम नेता को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद भाजपा ने नागौर के डीडवाना से विधायक यूनुस खान को टोंक से टिकट दे दिया। जबकि टोंक से पिछली बार भाजपा के अजीत सिंह जीते थे। शुरुआती सूचियों में डीडवाना से यूनुस टिकट नहीं मिलने पर खान के समर्थक नाराजगी जताने जयपुर पहुंच गए थे। खान डीडवाना से 2003 और 2013 का चुनाव जीते थे, लेकिन 2008 का चुनाव हार गए थे।

सियासी गुणा-भाग
भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की सभी 200 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। कांग्रेस ने पांच सीटें गठबंधन एनसीपी, लोजपा, रालोद के लिए छोड़ी हैं।

Friday, November 16, 2018

बहू ने ससुर को बताया चुड़ैल, बेटे-बेटी और पत्नी ने मिलकर वृद्ध को मार डाला

गुजरात के सूरत में पुलिस ने एक शख्स के कत्ल का सनसनीखेज खुलासा किया है. उसके कत्ल की साजिश किसी और ने नहीं बल्कि उसके बेटे की पत्नी ने रची थी. दरअसल, मृतक अपने बेटे-बहू को घर से निकालना चाहता था. उसकी हरकत से सभी घरवाले परेशान थे. इसी दौरान बहू ने घरवालों से कहा कि ससुर के अंदर कोई चुडैल या भूत घुस गया है. इसके बाद सारे घरवालों ने पीट-पीटकर उस शख्स को मौत के घाट उतार दिया.

दरअसल, सूरत में बीती 10 दिसंबर को कानजी कुम्हार नामक बुजुर्ग शख्स की हत्या कर दी गई थी. पुलिस मामले की छानबीन कर रही थी. पुलिस को बताया गया कि उसकी मौत का कारण बीमारी थी. लेकिन पुलिस की छानबीन जैसे जैसे आगे बढ़ी, ये मामला कत्ल का निकला. जिसकी सूत्रधार मृतक की बहू निशिता थी.

कानजी कुम्हार के बेटे प्रकाश ने दो साल पहले अपनी मर्जी और जिद से गैर समाज की निशिता से शादी की थी. लेकिन कानजी इस रिश्ते से खुश नहीं था. वह अपने बेटे-बहू को घर से निकालना चाहता था. वो कई बार ये बात उन दोनों को कह चुका था. इस बात से प्रकाश और निशिता काफी परेशान थे.

इसी दौरान कानजी की बहू निशिता ने एक खौफनाक साजिश रची. कानजी काफी समय से बीमार था. वो अजीब हरकतें करता था. इसी बात का फायदा उठाकर निशिता ने अपनी सास, पति और ननद को बताया कि ससुर जी के शरीर में किसी चुडैल का वास है.

उसी दिन निशिता ने कहा कि ससुर जी की पिटाई करेंगे तो वो चुडैल निकल जाएगी. ससुर जी को कुछ नहीं होगा, वो फिर से ठीक हो जाएंगे. घरवालों ने उसकी बात पर यकीन कर लिया. निशिता की बात मानकर पत्नी, बेटी-बेटों ने ही कानजी को पीटना शुरू कर दिया. उन्होंने कानजी को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई. इस पूरी वारदात को कानजी की 75 वर्षीय मां के सामने अंजाम दिया गया, मगर उसे नहीं पता था कि उसका बेटा मर चुका है.

पुलिस को तफ्तीश के दौरान पता चला कि निशिता ने भी कई बार कानजी को पीटा था. वो कहती थी कि भूत की पिटाई कर रही है. वारदात के दिन निशिता ने परिजनों के साथ मिलकर पहले कानजी की पूजा की और फिर उसे घंटों पीटा. उसकी मौत के बाद भी उसने पूरे परिवार को कानजी की लाश पर बैठाकर रखा था. उसका कहना था कि कानजी इससे जी उठेंगे.

वारदात के बाद कानजी की पत्नी हंसा, बेटे प्रकाश और दिनेश, नाबालिग बेटी, दूसरी बेटी हेतल और बहू निशिता कानजी की मां को साथ लेकर वहां से अपने गावं चले गए. मामले का खुलासा हो जाने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सभी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

Sunday, November 11, 2018

इसराइल, ओमान और ईरान के 'लव ट्राइएंगल का हीरो'

यही वजह है कि मध्य पूर्व के एक किनारे पर मौजूद ये छोटा सा देश एक बार फिर इस क्षेत्र के अनेक विवादों में से एक विवाद के केंद्र में आ गया है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की मेज़बानी का ज़िम्मा उठा कर ओमान मध्य पूर्व के अख़बारों की सुर्खि़यों में आ सकता है.

शायद ओमान का ये क़दम मध्य पूर्व के देशों की ओर से इसराइल को मान्यता देने और तेलअवीव क्षेत्र के अन्य अरब देशों से संबंध सुधारने की भूमिका तैयार कर सकता है.

इसराइली प्रधानमंत्री के अप्रत्याशित मस्कट दौरे के एक दिन बाद ईरान की नीति के विपरीत जाकर ओमान ने कहा कि शायद अब वो समय आ गया है कि इसराइल को भी क्षेत्र के अन्य देशों की तरह स्वीकृति मिले.

इस बयान के सिर्फ़ 24 घंटे पहले अलग-अलग मीडिया आउटलेट्स ने एक वीडियो प्रसारित किया था जिसमें ओमान के राजा सुल्तान क़ाबूस को इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी के साथ ओमान के राजमहल में देखा गया, जबकि ओमान के संबंध ईरान के साथ भी हमेशा से सौहार्दपूर्ण और मधुर रहे हैं.

ओमान की विदेश नीति
नेतन्याहू के मस्कट दौरे के मात्र चार दिन पहले ओमान के विदेश मंत्री के राजनीतिक सहायक मोहम्मद बिन औज़ अल-हस्सान ने तेहरान का दौरा किया था और ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से मुलाक़ात भी की थी.

एक ही समय में इसराइली प्रधानमंत्री का स्वागत और मेज़बानी और ईरान के साथ दोस्ताना रिश्ते, हक़ीक़त में ये सुल्तान क़ाबूस की ख़ास विदेश नीति का नतीजा है.

ओमान ने 70 के दशक से अब तक अपने देश के लिए एक अनोखी रणनीति अपनाई है. इसका उदाहरण मध्य पूर्व में कम ही मिलता है जैसे:-

• ओमान क्षेत्रीय विवाद में अमूमन तटस्थ रहा है.

• ओमान एक अरब देश है और खाड़ी सहयोग परिषद का सदस्य भी है लेकिन उसने क्षेत्र में 'मित्र देशों को धोखा देने वाले' अरब समूह के साथ ख़ुद को कभी नहीं रखा.

दूसरे देशों के अंदरुनी मामलों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया है जबकि हाल के सालों में ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व में बहुत बढ़ी हैं, जैसे यमन और सीरिया की स्थिति.

• और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ओमान ने हमेशा दोनों पक्षों का साथ दिया है ताकि एक मध्यस्थ का सम्मान हासिल कर सके.

ओमान ही क्यों?
इन्हीं विशेषताओं ने इस तटस्थ देश को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है.

यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में जिस रफ़्तार से ओमान के राजनयिक दूसरे देशों का दौरा कर रहे हैं और दूसरे देशों के नेता और अफ़सर मस्कट आ-जा रहे हैं, उससे ओमान के बारे राजनीतिक अटकलबाज़ियां बढ़ गई हैं.

आज जबकि इसराइल और फ़लस्तीन के बीच अमन बहाली को लेकर बढ़ती नाउम्मीदगी के साये में अगर ओमान इस ऐतिहासिक विवाद में अपना किरदार निभाने का सम्मान प्राप्त कर रहा है तो ये अचानक एक रात में लिए गए फ़ैसले का नतीजा नहीं है.