Sunday, November 11, 2018

इसराइल, ओमान और ईरान के 'लव ट्राइएंगल का हीरो'

यही वजह है कि मध्य पूर्व के एक किनारे पर मौजूद ये छोटा सा देश एक बार फिर इस क्षेत्र के अनेक विवादों में से एक विवाद के केंद्र में आ गया है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की मेज़बानी का ज़िम्मा उठा कर ओमान मध्य पूर्व के अख़बारों की सुर्खि़यों में आ सकता है.

शायद ओमान का ये क़दम मध्य पूर्व के देशों की ओर से इसराइल को मान्यता देने और तेलअवीव क्षेत्र के अन्य अरब देशों से संबंध सुधारने की भूमिका तैयार कर सकता है.

इसराइली प्रधानमंत्री के अप्रत्याशित मस्कट दौरे के एक दिन बाद ईरान की नीति के विपरीत जाकर ओमान ने कहा कि शायद अब वो समय आ गया है कि इसराइल को भी क्षेत्र के अन्य देशों की तरह स्वीकृति मिले.

इस बयान के सिर्फ़ 24 घंटे पहले अलग-अलग मीडिया आउटलेट्स ने एक वीडियो प्रसारित किया था जिसमें ओमान के राजा सुल्तान क़ाबूस को इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी के साथ ओमान के राजमहल में देखा गया, जबकि ओमान के संबंध ईरान के साथ भी हमेशा से सौहार्दपूर्ण और मधुर रहे हैं.

ओमान की विदेश नीति
नेतन्याहू के मस्कट दौरे के मात्र चार दिन पहले ओमान के विदेश मंत्री के राजनीतिक सहायक मोहम्मद बिन औज़ अल-हस्सान ने तेहरान का दौरा किया था और ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से मुलाक़ात भी की थी.

एक ही समय में इसराइली प्रधानमंत्री का स्वागत और मेज़बानी और ईरान के साथ दोस्ताना रिश्ते, हक़ीक़त में ये सुल्तान क़ाबूस की ख़ास विदेश नीति का नतीजा है.

ओमान ने 70 के दशक से अब तक अपने देश के लिए एक अनोखी रणनीति अपनाई है. इसका उदाहरण मध्य पूर्व में कम ही मिलता है जैसे:-

• ओमान क्षेत्रीय विवाद में अमूमन तटस्थ रहा है.

• ओमान एक अरब देश है और खाड़ी सहयोग परिषद का सदस्य भी है लेकिन उसने क्षेत्र में 'मित्र देशों को धोखा देने वाले' अरब समूह के साथ ख़ुद को कभी नहीं रखा.

दूसरे देशों के अंदरुनी मामलों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया है जबकि हाल के सालों में ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व में बहुत बढ़ी हैं, जैसे यमन और सीरिया की स्थिति.

• और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ओमान ने हमेशा दोनों पक्षों का साथ दिया है ताकि एक मध्यस्थ का सम्मान हासिल कर सके.

ओमान ही क्यों?
इन्हीं विशेषताओं ने इस तटस्थ देश को एक बड़े राजनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है.

यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में जिस रफ़्तार से ओमान के राजनयिक दूसरे देशों का दौरा कर रहे हैं और दूसरे देशों के नेता और अफ़सर मस्कट आ-जा रहे हैं, उससे ओमान के बारे राजनीतिक अटकलबाज़ियां बढ़ गई हैं.

आज जबकि इसराइल और फ़लस्तीन के बीच अमन बहाली को लेकर बढ़ती नाउम्मीदगी के साये में अगर ओमान इस ऐतिहासिक विवाद में अपना किरदार निभाने का सम्मान प्राप्त कर रहा है तो ये अचानक एक रात में लिए गए फ़ैसले का नतीजा नहीं है.

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