सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर अपना जवाब सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा से कहा था कि जितना जल्दी हो सके, अपना जवाब पेश करें। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सीवीसी की जांच पर आज ही वर्मा को जवाब पेश करना होगा, सुनवाई को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच को वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि सीबीआई डायरेक्टर सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस में अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाएंगे। इस पर बेंच ने कहा- हम तारीख आगे नहीं बढ़ाएंगे। जितना जल्दी हो सके आप जवाब पेश करें, हमें इसे पढ़ना है।
सीवीसी ने कुछ आरोपों पर जांच के लिए वक्त मांगा था
बेंच के निर्देश के बाद शंकरनारायण ने कहा कि आलोक वर्मा खुद सोमवार को अपना जवाब दाखिल करेंगे। इससे पहले अदालत ने कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी रिपोर्ट में कई प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। कुछ आरोपों पर आयोग ने जांच के लिए और वक्त भी मांगा था।
विवाद के बाद नागेश्वर राव हैं एजेंसी के अंतरिम प्रमुख
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था। छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी से जांच करने को कहा था।
राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सोमवार को पांचवीं और आखिरी लिस्ट जारी कर दी। इसमें आठ नाम हैं। छह नाम नए हैं। दो घोषित उम्मीदवारों के नाम बदले गए हैं। पहला नाम टोंक सीट से मौजूदा विधायक अजीत सिंह का है। इनकी जगह पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से होगा। वहीं, दूसरा नाम खेरवड़ा सीट से शंकरलाल खिराड़ी का है। पहले इन्हें मौजूदा विधायक नानलाल आहरी का टिकट काटकर दिया गया था, लेकिन अब पार्टी ने वापस आहरी पर भरोसा जताया।
टोंक में 2.20 लाख वोटरों में से करीब 40 हजार मतदाता मुस्लिम हैं। यह कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। 1972 के विधानसभा चुनाव से कांग्रेस यहां मुस्लिम उम्मीदवार ही उतार रही थी। 1980 से भाजपा ने यहां से सिर्फ हिंदू उम्मीदवार को ही टिकट दिया। इस बार समीकरण बदल गए। कांग्रेस ने 46 साल की अपनी परंपरा तोड़ते हुए गैर-मुस्लिम नेता को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद भाजपा ने नागौर के डीडवाना से विधायक यूनुस खान को टोंक से टिकट दे दिया। जबकि टोंक से पिछली बार भाजपा के अजीत सिंह जीते थे। शुरुआती सूचियों में डीडवाना से यूनुस टिकट नहीं मिलने पर खान के समर्थक नाराजगी जताने जयपुर पहुंच गए थे। खान डीडवाना से 2003 और 2013 का चुनाव जीते थे, लेकिन 2008 का चुनाव हार गए थे।
सियासी गुणा-भाग
भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की सभी 200 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। कांग्रेस ने पांच सीटें गठबंधन एनसीपी, लोजपा, रालोद के लिए छोड़ी हैं।
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